लोक डाउन में शहर में फॅसे एक मजदुर की दास्तां…

ये ठण्डी हवा का झोंका,
माँ की यादो की दस्तक लाया,
छूकर उनकें कदमो को ,
एक आशीष मुझ तक लाया,

ये ठंडी हवा का झोंका,
पिताजी की चिंताओं की दस्तक लाया,
छूकर उनके मन को मुझ तक,
कुछ जिम्मेदारियों का अहसास लाया,

ये ठंडी हवा का झोंका,
बहना की यादों की पिटिया लाया,
छूकर उसके हाथों को मुझ तक,
राखी की यादे ताजा कर पाया,

एक ठंडी हवा का झोंका,
अर्धांगिनी से मिलने के वादे की यादे लाया,
छूकर उसको ,मुझको छुआ,
प्रीत का अहसास , मुझे कराया,

ये ठंडी हवा का झोंका,
मेरी गांव की यादे , ताजा कर पाया,
मेरी यादों ओर अहसासों को,
फिर से ताजा कर पाया,
मेरे लॉकडाउन में घर से दूर फंसे होने के गम को,
मैं कुछ पल के लिए भुला पाया,
में कुछ पल के लिए भुला पाया,
hsmk jain✍️

Leave a comment